
देवास। जिला चिकित्सालय में प्रसव के लिए भर्ती गर्भवती महिलाओं को ऐन वक्त पर रेफर करने की नौबत सामने आई है। बताया जा रहा है कि कई गर्भवती महिलाएं पिछले 4-5 दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं। परिजनों को कभी सामान्य प्रसव तो कभी ऑपरेशन की संभावना बताई जा रही थी, लेकिन जब प्रसव का समय आया तो एनेस्थीसियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर महिलाओं को इंदौर या अमलतास अस्पताल रेफर करने की स्थिति बन गई।

मीडिया के पहुंचने पर हुई व्यवस्था, लेकिन तब तक कई परिवार हो चुके थे रवाना.
मामले में उस समय और गंभीर सवाल खड़े हुए, जब मीडिया के पहुंचने के बाद एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की व्यवस्था कर ऑपरेशन शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई। वहीं, इससे पहले कई गरीब ग्रामीण परिवार अपनी गर्भवती महिलाओं को लेकर दूसरे अस्पतालों के लिए रवाना हो चुके थे!

डॉक्टर ने भी बताई एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता!
ड्यूटी डॉक्टर के अनुसार,एनेस्थीसियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को रेफर करने की स्थिति बनी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अस्पताल में गर्भवती महिलाएं कई दिनों से भर्ती थीं, तो समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
क्या प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में जरूरी विशेषज्ञ की उपलब्धता सुनिश्चित करना अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं है?

परिजनों ने लगाए सवाल, व्यवस्थाओं पर उठाई उंगली
कुछ परिजनों ने अस्पताल में कथित लेन-देन को लेकर भी बातें कहीं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनका कहना था कि यदि खर्च करना ही पड़े, तो निजी अस्पताल जाने का विकल्प क्यों न चुना जाए? इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
जिला चिकित्सालय गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी उम्मीद है। ऐसे में प्रसव के लिए भर्ती महिलाओं को अंतिम समय में रेफर करने की नौबत क्यों आई? एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की समय पर व्यवस्था क्यों नहीं थी? क्या अस्पताल प्रबंधन को पहले से स्थिति की जानकारी नहीं थी?
जच्चा और बच्चा की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे संवेदनशील मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना चाहिए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जानी चाहिए।